1/
कन्या भ्रूण हत्या समाज का बहुत घटिया काम बताऊं।।
महिला थोड़ी पुरुष घणे इसका असर आज गिनाऊं।।
1
महिला को दोयम दर्जा दे राख्या म्हारे समाज नै
हरेक जगां पाछै राखैं भूले बराबरी की आवाज नै
और भी कई मामले सैं खोल कै सारे पत्ते दिखाऊं।।
2
भाई बाहण कोन्या बराबर भाई की जगां ऊंची सै
कैहवण नै सैं बराबर पर असल मैं महिला नीची सै
मानैं दोनों नै बराबर समाज नै मैं क्यूकर समझाऊं।।
3
समान काम कम भुगतान महिला तैं किया जावै
अवैतनिक श्रम का भी फालतू बोझ दिया जावै
श्रम बाजार मैं महिला की कैसे हिस्सेदारी बराबर ल्याऊं।।
4
गर्भावस्था के बख्त रणबीर महिला मौत ज्यादा बताई
पुरुष महिला अनुपात मैं महिला की कमी सै आई
बस छोरे के जन्म ऊपर छठ ना छोरी की छठ मनाऊं।।
2/
बढ़ती महंगाई नै आम जनता कै आज साँस चढ़ाई रै।।
नौकरी पेशा वर्ग किसान की मुशीबत और बढ़ाई रै ।।
1
छोटा व्यापारी भी इसके बोझ तलै आज दब लिया
रसोई गैस डीजल के बढ़े दाम नै समाज जकड़ दिया
घर के बजट कै फांसी इन बढ़े दामों नै आज लगाई रै ।।
2
घर चलाना मुश्किल होया तो रसोई खर्च बढ़ता जारया
पेट भराई नहीं हो पाती करजा जावै यो चढ़ता भारया
बालकों के कम खाने नै उनकी सेहत कसूती ढाई रै ।।
3
बढ़ती महंगाई नै मुश्किल करी बालकों की पढ़ाई
स्वास्थ्य की देखभाल भी महंगी कई नै ज्याण
गंवाई
संकट कई ढाल के बढ़गे मुश्किल सबकी या गिनाई रै ।।
4
किसान का खेती करना घने घाटे का सौदा यो होग्या
खेती की लागत बढ़गी एमएसपी किसान नै डबोग्या
रणबीर की कविता पै भी या महंगाई कसूती छाई रै ।।
[3
आजादी
खतरे मैं आजादी म्हारी जिंदगी बणा मखौल दी।
इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।
आजादी पावण की खातर असली उठया तूफ़ान था
लाठी गोली बरस रही थी जेलां मैं नहीं उस्सान था
एक तरफ बापू गांधी दूजी तरफ मजदूर किसान था
कल्पना दत्त भगत सिंह नै किया खुल्ला ऐलान था
इंक़लाब जिंदाबाद की उणनै या ऊंची बोल दी ।
सत्तावन की असल बगावत ग़दर का इसे नाम दिया
करया दमन फिरंगी नै उदमी राम रूख पै टांग दिया
सैंतीस दिन रहया जूझता कोये ना मिलने जाण दिया
हंस हंस देग्या कुर्बानी हरियाणे का रख सम्मान दिया
हिन्दू मुस्लिम एकता नै गौरी फ़ौज या खंगोल दी।
भारतवासी अपने दिलां मैं नए नए सपने लेरे थे
नहीं भूख बीमारी रहने की नेता हमें लारे देरे थे
इस उम्मीद पै हजारों भाई गए जेलों के घेरे थे
दवाई पढ़ाई का हक मिलै ये नेक इरादे भतेरे थे
गौरे गए आगे काले रणबीर की छाती छोल दी।
फुट गेरो और राज करो ये नीति वाहे चाल रहे रै
कितै जात कितै धर्म नै ये बना अपनी ढाल रहे रै
आपस मैं लोग लड़ाए लूट की कर रूखाल रहे रै
वैज्ञानिक नजर जिसकी जी नै कर बबाल रहे रै
इक्कीसवीं की बात करैं राही छटी की खोल दी।
2003.2004
[4
*हरियाणे के वीरो जागो*
*हरियाणे के वीरो जागो तजो जात के बाणे नै।*
*ढेरयां आला कुड़ता सै समझो इसके ताणे नै।*
1
गरीब माणस नै मरज्याणी गरीब भाई तैं दूर करै
अमीर होज्यां एक थाली मैं यो गरीब मजबूर फिरै
*अमीर इस्तेमाल भरपूर करै गरीबाँ नै बहकाणे नै।*
अमीरां का छोरा कोये बेरोजगार जमा ना पाणे का
पुलिस कचहरी सब उनके ख़ाली हुक्म ना जाणे का
*गरीब लूट कै खाणे का टोहया सै राह मरज्याने नै।*
मेहनत जात गरीबाँ की और कोये तो जात नहीं
जाट ब्राह्मण सिर फुड़वावें मिलै खान नै भात नहीं
*जात मिटा सकै दुभांत नहीं बात कही सै स्याणे नै।*
जात के ठेकेदारां की बांदी या करै इनकी ताबेदारी
आम आदमी जकड़ लिया अमीर करै पूरी पहरेदारी
*रणबीर करै नहीं चाटूकारी नहीं बेचै अपणे गाणे नै।*
[5
*नोएडा और गुड़गामा*
*आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।*
*युवा और युवतियों की या मजबूरी दिखाणी चाही।*
1
मियाँ बीबी ये दोनों मिलकै आज खूब कमावैं देखो
तीस लाख का पैकेज ये साल का दोनों पावैं देखो
तड़कै आठ बजे त्यार हो नौकरियां पर जावें देखो
रात के ग्यारह बजे ये वापिस घर नैं आवैं देखो
*इन कमेरयां की आज या पूरी कथा सुणानी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
2
अपने पारिवारिक रिश्ते बताओ कैसे चलावैं रै
ऐकले रैह रैह कै शहरां मैं ये कैरियर बनावैं रै
भीड़ मैं रैह कै भी अपने नै कतिअकेला पावैं रै
गांम गेल्याँ अपना रिश्ता बताओ कैसे निभावैं रै
*आज के दौर की या विरोधाभाष दिखाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
3
मोटे वेतन की नौकरी छोड नहीं पावैं देखो भाई
अपने बालकां नै घरां छोड़ कै नै जावैं देखो भाई
फुल टाइम की मेड एजेंसी तैं ये ल्यावैं देखो भाई
उसके धोरै बालक ये अपने पलवावैं देखो भाई
*मजबूरी या लाइफ आज इणनै अपनाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
4
मात पिता दूर रहवैं टाइम काढ़ नहीं पाते भाई
दादा दादी नाना नानी इनके बन्द हुए खाते भाई
घर मैं आवैं इस्तै पहले बालक तो सो जाते भाई
नॉएडा गुड़गामा का रणबीर यो हाल सुनाते भाई
*बदल गया जमाना हरयाणा ली अंगड़ाई चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
[6
आजादी
देश पै खतरा मंडरावै लडां आजादी बचाने की लड़ाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
1
पूरे देश मैं फैल रहया खतरा यो मनुवाद का बताया
चलता आवै खतरा देश मैं इबै सामंतवाद का बताया
बढ़ता जावै सै शिकंजा आज पूंजीवाद का बताया
इन सब तैं बड्डा खतरा गया साम्राज्यवाद का बताया
संविधान नै पूरा खतरा आजादी इन खतरों तैं चाही।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
2
एक खतरा और बताया सै यो हिंदुत्ववाद का सुनियो
दूजा खतरा और छाया सै तालिबानवाद का सुनियो
तीजा खतरा और दिखाया सै यो संघवाद का सुनियो
चौथा खतरा समझाया सै यो आतंकवाद का सुनियो
इन खतरयां तैं मिलकै या आजादी की आवाज लगाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
3
पितृ सत्ता बड़ी बीमारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
भ्रूण हत्या उधम मचारी इसतैं भी आजादी चाहिये सै
दहेज का उत्पीड़न भारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
बेरोजगारी बढ़ती जारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
आर्थिक संकट बढ़ता जावै इसकी बात गई छिपाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
4
हिदू राष्ट्र तैं आजादी हो यो सबका ही भाई चारा हो
इस्लामी राष्ट्र तैं आजादी हो पूरी दुनिया का नारा हो
जातपात से आजादी हो चाहवै अम्बेडकर म्हारा हो
अभिव्यक्ति की आजादी हो सबनै संविधान प्यारा हो
रणबीर बनती जावै सै नबै दस की पालेबन्दी भाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
[7
अन्ध विश्वास का हमला सालो साल यो बढ़ता जावै ॥
कुम्म के मेले का खेल देखो हमने या बात सै समझावै ।।
1
एक सौ बयालीस साल पहले ठारा सौ बियासी मैं मनाया
बीस हजार का कुल खर्चा यो आठ लाख आने आल्याँ पै बताया
महा कुम्म दो हजार पच्चीस का खर्च साढ़े सात हजार करोड़ आवै।।
2
ठारा सौ ब्यासी मैं कुंभ मैं कुल आठ लाख लोग नहाये कहते
ठारा सौ चौरानवै मैं कुंभ मैं दस लाख लोग बताये कहते
दो हजार पच्चीस मैं कुंभ मैं या चालीस करोड जनता नहावै ।।
3
इन चालीस करोड़ लोगों का कितना खर्चा और आवैगा
किराया भाड़ा रोटी राटी का खर्चा कितना और वो ठावैगा
इतना बेजोड धन देश का जनता इस कुंभ के म्हां गँवावै ।।
4
इस सारी आवा जायी मैं जनता और भी कई दुख ठावै बताई
इस सार धन तैं पूरी होज्या कईयों की पढाई और दवाई
रणबीर सोच सोच कैभी ना बात पूरी इसपै लिख पावै।।
