1मई, 2020 (पुरानी पोस्ट)
आज मजदूर दिवस है, सभी दोस्तों को मजदूर दिवस की बधाई! और हमें यह ध्यान रखना है देश का 80 फ़ी सदी तबका मजदूर है, क्योंकि खेती करने वाली आबादी बेशक किसान कहलाती है लेकिन करते तो ताउम्र मजदूरी ही हैं! जो व्यक्ति/संस्था मजदूर-किसान का नहीं, वो हिंदुस्तान का नहीं!
लेकिन दक्षिण हरियाणा, विशेष तौर से चरखी दादरी, बाढ़ड़ा, लोहारु, महेंद्रगढ़, नारनौल, तोशाम, भिवानी, जींद आदि क्षेत्रों के लिए इस दिन का महत्व मजदूर दिवस के अलावा भी है!
प्रथम मई,1911 को माननीय चौधरी निहाल सिंह तक्षक जी का जन्म हुआ था! चौधरी साहब ने 1936 में रामजस कॉलेज दिल्ली से विश्व विद्यालय में 2nd position लेते हुए अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी; एक असाधारण उपलब्धि! उस समय चरखी दादरी जिला होता था तथा इसमें 184 गांव थे, लेकिन नवाबी राज होने के कारण शिक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं थे! पूरे जिले में मात्र 3 मिडिल स्कूल व एक हाई स्कूल था! चौधरी साहब ने 1 अक्टूबर 1936 को बिरला एजुकेशन ट्रस्ट पिलानी में बतौर निदेशक (तत्कालीन इंस्पेक्टर) पदभार ग्रहण किया! उस समय इस ट्रस्ट के आधीन 17 पाठशालाएं कार्यरत थी और सभी राजस्थान में थी!
चौधरी साहब ने इस क्षेत्र को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया, दिसंबर 6,1936 को इमलोटा में पहला स्कूल शुरू किया तथा 31 दिसंबर 1946 तक के अपने कार्यकाल में 311 स्कूल खोले ! जनवरी 1947 को जींद रियासत की पहली पॉपुलर सरकार में वे शिक्षा एवम स्वास्थ्य विभाग के मंत्री बने, इस दौरान 50 नये स्कूल खोले !
देश की आजादी के बाद वे हमारे पहले शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री बने, इस दौरान दौरान 150 नये स्कूल खोले तथा स्वयं के द्वारा स्थापित सभी बिरला स्कूलों का सरकारीकरण किया, उनमें कार्यरत सभी कर्मचारियों को पिछली सेवा सहित सरकारी सेवा में लिया! उस समय स्कूल भवन के लिये ग्रामीणों के पास धन का अभाव था, चौधरी साहब स्वयं ग्रामीणों को लेकर पूले (झुण्डे) कटवाकर छप्पर डलवाते तथा उसी में स्कूल शुरू कर देते थे ! फिर शिक्षा अभाव के कारण अध्यापक नहीं मिलते थे फिर कम पढ़े लिखे नौजवानों को नियुक्त करके उन्हें भी पढ़ाकर अध्यापक बनाते थे! लोगों में पढ़ने के प्रति रुझान बनाने के लिए उनसे door to door संपर्क करते थे! तथाकथित निम्न जाति के अध्यापक से ऊंची जाति के अभिभावक अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते थे, फिर चौधरी साहब उन्हे मनाते थे !अध्यापक को 8 रुपये महीना मिलता था बाद में 17 रुपये कर दिया था!ठीक पढ़े लिखे अध्यापक ज्यादा वेतन की मांग करते थे, तो वे स्वयं बोरी लेकर गांव से अन्न इकठ्ठा करके, उसे बेचकर उन अध्यापकों को अतिरिक्त देते थे 1 प्रत्येक स्कूल की monitoring करना बड़ा ही दुष्कर कार्य था 1 सड़कें नहीं थी तो यातायात के साधन भी नहीं थे 1 चौधरी साहब ऊंट पर चलते हुए एक स्कूल से दूसरे स्कूल जाते थे, उन्होने कभी भी जेठ की लू, सावन की बरसात व माघ, पौ की सर्दी की परवाह नहीं की!
एक ही जूनून था कि हर गांव को शिक्षित करना और उन्होंने अपने मिशन में सफलता भी पाई!
सन् 1941 में में महान आर्य समाजी स्वामी स्वतंत्रतानंद जी लोहारु में आर्य समाज की स्थापना करने के लिए आये तो नवाब ने उन पर आक्रमण करा दिया तथा स्वामी जी को लहू लुहान हालात में दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया! चौधरी निहाल सिंह तक्षक जो स्वयं आर्य समाजी थे ने डंके की चोट पर लोहारु में आर्य समाज की स्थापना की तथा 1946 तक प्रधान रहे ! लोहारु नवाब ने अपनी रियासत में शिक्षा पर प्रतिबंध लगा रखा था फिर भी चौधरी साहब ने 12 गांवों में यज्ञशालाएं स्थापित करके शिक्षण कार्य शुरू किया! यह अत्यंत महत्वपूर्ण व दुष्कर कार्य उन्होने महाराजा जींद द्वारा पेश किये गये तहसीलदार व लेफ्टिनेन्ट के पदों को ठुकरा कर किया !
शिक्षा के जनक चौधरी निहाल सिंह तक्षक जी के जन्म दिन पर उन्हे कृतज्ञ हरियाणा वासियों की विनम्र श्रद्धाजंलि!
(साभार : श्री रमेश कुमार तक्षक )
One of the Greatest Leaders , Social Reformers, Educationists n a very Sensitive human , Sh Nihal Singh Takshk will always be remembered for his Immense Contribution in making Basic Education available to the Masses !
You will continue to rule our Hearts, Sir!
Thnx, Sanjeev Guddu Taxak, Praveen Taxak , Bijender Singh Sangwan , संजीव गोदारा अधिवक्ता, Ramesh Takshak , for organising Functions to spread awareness about this great Son of Soil! Please keep it up! My Salute to you all for making the people of the State aware of the immense Contribution of the Great leader in spreading Education in Haryana during those days!
(Photo/Hindi text courtesy: Ramesh Takshak)
